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1. सफेद जीठका कारण
हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की जीठसफेद होने के अलग कारण हो सकते हैं. लेकिन à¤à¤• बात जो सबमें समान होती है, वह ये है कि सफेद जीठसà¤à¥€ को असहज करती है. आमतौर पर सफेद जीठहोने का अरà¥à¤¥ यह होता है कि आपकी रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ काफी कमजोर हो गई है. यानी आपको अपना इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® मजबूत करने की जरूरत है. और जिन लोगों में सफेद जीठकी समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, उनमें से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° में इमà¥à¤¯à¥‚निटी की कमजोरी ही सामने आती है.
कमजोर इमà¥à¤¯à¥‚निटी के कारण जीठपर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की संखà¥à¤¯à¤¾ काफी बढ़ जाती है और फंगी पनप जाती है. ये कई तरह के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और फंगी हम सà¤à¥€ के शरीर में रहते हैं और ये हमारे शरीर के जरूरी à¤à¥€ होते हैं. लेकिन जब रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर पड़ जाती है तो इन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और फंगी का संतà¥à¤²à¤¨ बिगड़ जाता है. इसका नतीजा यह होता है कि जीठकाफी सफेद नजर आने लगती है.
2. जीठसफेद दिखने के अनà¥à¤¯ कारण
जिन लोगों की कीमोथेरपी चल रही होती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ जीठसफेद होने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो जाती है.
किसी लंबी गंà¤à¥€à¤° बीमारी से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿, जो लंबे समय से दवाओं का सेवन कर रहा हो, उसे à¤à¥€ टंग वाइट होने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है.
कà¥à¤› बहà¥à¤¤ ही कम केसेज में या कहिठकि कà¥à¤› दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मामलों में यह समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¡à¥à¤¸ के रोगियों में à¤à¥€ देखने को मिलती है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह रोग à¤à¥€ सबसे पहले इमà¥à¤¯à¥‚निटी पर ही अटैक करता है.
जीठमें दरार के कारण
जीठमें दरार पड़ने के सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कारण बता पाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का मानना है कि फिशरà¥à¤¡ टंग की परेशानी मेलà¥à¤•ोरà¥à¤¸à¤¨-रोसेंथल सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, काउडन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® और डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती है। कà¥à¤› विशेष सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जीठमें दरार पड़ने के निमà¥à¤¨ कारण होते हैं।
विटामिन की कमी
आमतौर पर फिशरà¥à¤¡ टंग की परेशानी शरीर में विटामिन की कमी की वजह से होती है। शरीर में विटामिन बी कॉमà¥à¤ªà¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸, बी6, बी1, बी12 की कमी की वजह से जीठफटती है। इसके अलावा आयरन जैसे विटामिन लेना à¤à¥€ जरूरी है। उमà¥à¤° के साथ-साथ कई अनà¥à¤¯ कारण हो सकते हैं, इस परेशानी के। आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ फिशरà¥à¤¡ टंग से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ होती हैं।
गंà¤à¥€à¤° बीमारी
जिन लोगों को बचपन से फिशरà¥à¤¡ टंग की परेशानी है और जीठमें कोई दरà¥à¤¦ नहीं है। तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घबराने की जरूरत नहीं है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¥€ तक जीठकी उपरी सतह फटने से कोई परेशानी नहीं हà¥à¤ˆ है। लेकिन à¤à¤¸à¥‡ लोग जो किडनी रोग, अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ डायबिटीज, कीमोथेरेपी आदि के पेशेंट हैं, उनमें जीठफटने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ होने पर पेशेंट को ओरल दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं, जिस वजह से मà¥à¤‚ह में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गà¥à¤°à¥‹à¤¥ करता है और जीठमें दरारें पड़ जाती हैं। इस कारण जीठफटने का à¤à¤• कारण अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ डायबिटीज à¤à¥€ है।
आइसीयू में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ मरीज को
लंबे समय से अगर कोई मरीज आईसीयू में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ है, उसको जो दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं, उसकी वजह से à¤à¥€ जीठमें दरार पड़ने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। डॉ. मंजीता का कहना है कि फेशियल पैरालिसिस जैसे बेलà¥à¤¸ पालà¥à¤¸à¥€ में à¤à¥€ जीठमें दरारें पड़ जाती हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है सà¤à¥€ को पेलà¥à¤¸ पालà¥à¤¸à¥€ में जीठमें दरार पड़ें। लेकिन फिशरà¥à¤¡ टंग का à¤à¤• कारण गंà¤à¥€à¤° बीमारी हो सकती है। यह परेशानी बढ़ती उमà¥à¤° में होती है।
वायरल बीमारी
किसी तरह की वायरल बीमारी में à¤à¥€ फिशरà¥à¤¡ टंग की परेशानी होती है। कोविड से ठीक होने वाले मरीजों में à¤à¥€ जीठसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ परेशानियां देखी जा रही हैं।
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